धान की फसल में कौन कौन सी खाद डालना चाहिए?

उत्पादक मुख्य रूप से अमोनियम सल्फेट का उपयोग करते हैं जहां उन्हें बढ़ते पौधों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरक एन (नाइट्रोजन आधारित) और एस (सल्फर आधारित) की आवश्यकता होती है। अगला, अमोनियम सल्फेट में केवल 21 प्रतिशत एन होता है। अन्य उर्वरक स्रोत अधिक केंद्रित और स्थानांतरित करने के लिए किफायती होते हैं जो इसे एन-कमी वाले क्षेत्रों के लिए बेहतर विकल्प बनाता है। हालांकि, अमोनियम सल्फेट एस का एक उत्कृष्ट स्रोत प्रदान करता है, जो प्रोटीन संश्लेषण सहित कई आवश्यक पौधों के कार्यों का समर्थन या संचालन करता है। चूंकि एन-अंश अमोनियम सल्फेट के अमोनियम रूप में मौजूद होता है, चावल के किसान अक्सर बाढ़ वाली मिट्टी में इसे लागू करते हैं, क्योंकि नाइट्रेट-आधारित उर्वरक विकृतीकरण नुकसान के कारण एक खराब विकल्प हैं।

खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग-

गोबर खाद या कम्पोस्ट – धान की फसल में 5 से 10 टन/हेक्टेयर अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट का प्रयोग करने से महंगी खाद के प्रयोग से बचा जा सकता है। यदि प्रति वर्ष पर्याप्त उपलब्धता न हो तो कम से कम एक वर्ष के अन्तराल पर इसका प्रयोग करना अत्यंत लाभदायक होता है।

Which fertilizer should be applied in paddy crop?
Which fertilizer should be applied in paddy crop?

खेत से अतिरिक्त पानी निकाल दें

यदि फसल में पानी की अधिकता हो तो अतिरिक्त पानी को खेत से निकाल दें। बाद में हल्की सिंचाई का काम करते रहें, ताकि मिट्टी फटने की समस्या न हो। यह काम इसलिए जरूरी है ताकि सौर ऊर्जा फसल की जड़ों तक पहुंच सके और फसल को ऑक्सीजन की आपूर्ति बनी रहे। यह कार्य रोपाई के 25 दिन बाद ही करना चाहिए ताकि समय पर पोषण प्रबंधन किया जा सके।

समय पर खिलाओ

रोपाई के 25-50 दिनों के बाद धान की फसल में टिलर निकलते हैं। यही वह समय होता है जब धान के पौधों को सबसे ज्यादा पोषण की जरूरत होती है। इस दौरान धान के खेत में एक एकड़ के हिसाब से 20 किलो नाइट्रोजन और 10 किलो जिंक के मिश्रण का छिड़काव करना चाहिए। किसान चाहे तो फसल में अजोला खाद भी मिला सकता है।

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जसवीर ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र में किसान इसकी शिकायत कर रहे हैं. कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि यह कोई बीमारी नहीं है। किसान इसमें किसी भी दवा का छिड़काव न करें। जहां धान नहीं लग रहा हो वहां किसान 2.5 किलो यूरिया और 100 लीटर जिंक प्रति एकड़ 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इसके बाद धान की बिजाई शुरू हो जाएगी। जहां पानी की बहुत कमी हो, वहां की जमीन को सूखने न दें, तीसरे से चौथे दिन उस पर पानी लगाएं। किसानों को बिना वैज्ञानिकों की सलाह के कोई भी दवा नहीं लगानी चाहिए। पीआर और बासमती में ज्यादा दवा डालने की जरूरत नहीं है।

यह भी पढ़े – 

Copy करने से बचे DMCA आ सकता है